STORYMIRROR

Rita Jha

Abstract Tragedy

3  

Rita Jha

Abstract Tragedy

दिखाई देता है

दिखाई देता है

1 min
217

साया न तेरा उभरता दिखाई देता है

अब ये तिरा रुप बदलता दिखाई देता है।


नजरें तिरी है झुकी अब न जाने किस खातिर

रुख तो तिरा अब बिगड़ता दिखाई देता है।


शिकवा गिला है अगर तो बता दे मुझको तू

रिश्ता नहीं ये महकता दिखाई देता है।


मेरे लिये हो रहा गर तुझे कोई दुविधा,

मैं छोड़ दूं पथ गुजरता दिखाई देता है।


यादें सभी साथ होगी मिरी मीठी 'गुड़िया' 

टूटे न वो, अब सम्हलता दिखाई देता है।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract