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Vijay Kumar parashar "साखी"

Abstract Inspirational

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Vijay Kumar parashar "साखी"

Abstract Inspirational

दीप जलाना है

दीप जलाना है

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दीप जलाना है तो इस मन का जलाना है

आग बुझानी है तो पानी सा हो जाना है

मिट जायेगा अंधेरा,भाग जायेगा कोरोना

कोरोना भगाना है तो घर पर ही रहना है


जीत तो सदा सत्य की ही होती है, दोस्तो,

सत्य को जिताना है, साबुन से हाथ धोना है

तम मिटेगा औऱ रोशनी का फूल खिलेगा

कोरोना का शूल मिटेगा, मास्क तो लगाना है


मन से अज्ञान के पर्दे को हमको हटाना है,

इसके लिये ख़ुदा को रोज शीश नवाना है

ये महामारी भी कुछ वक्त बाद ख़त्म होगी,

पर धैर्य के दीप को हर घट में जलाना है


ये लॉकडाउन का जो वक्त रखा सरकार ने,

उस वक्त को ईमानदारी से घर पर बिताना है

हर जगह पर उजाला ही उजाला होगा,

कोरोना-निशा को सूरज-किरणों से हटाना है।


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