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Kavita Sharrma

Abstract

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Kavita Sharrma

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धुंआ

धुंआ

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सिगरेट, तम्बाकू नशा जानलेवा है

इंसान इन्हें नहीं खाता ये इंसान को खा जाते हैं।


इनसे रखो हमेशा दूरी

ये जिंदगी के लिए है जरूरी


सिगरेट के धुंए की तरह

इक दिन तुम भी धुंआ बन उड़ जाओगे।


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