धरती हिन्दुस्तान की
धरती हिन्दुस्तान की
खून पसीने से सींचा है, धरती हिन्दुस्तान की।
सैनिक हैं हम हिन्द देश के, आहुति देते प्राण की।
कदम कदम पर सीना ताने,खड़े ही रहते हैं दीवाने।
शान तिरंगा ना झुक जाए, गर्दन क्यूं ना पड़े कटाने।
पहन केसरिया बाना निकले,रक्षित करने सम्मान की ।
खून पसीने से सींचा है, धरती हिन्दुस्तान की।
सैनिक हैं हम हिन्द देश के, आहुति देते प्राण की।।
उत्तर गिरिराज हिमालय पर, डाले रहते हम डेरे।
सागर की लहरों पर चढ़कर, सीमा प्रहरी हम घेरे ।
सपने इन ऑंखों में रखते,अखण्ड हिन्द अभियान की।
खून पसीने से सींचा है, धरती हिन्दुस्तान की।
सैनिक हैं हम हिन्द देश के, आहुति देते प्राण की।।
खुन पसीना सभी बहाए, माॅं की लाज बचाने को
सने रक्त से कंण कंण इसके, माॅं की आन बचाने को
बाॅंध क़फ़न सिर चले झूमते, जय बोलो वीर जवान की
खून पसीने से सींचा है, धरती हिन्दुस्तान की।
सैनिक हैं हम हिन्द देश के, आहुति देते प्राण की।।
