देवी कालरात्रि
देवी कालरात्रि
देवी दुर्गा का सातवाँ स्वरूप
मॉं कालरात्रि हैं विकराल रूप,
रूप भयंकर है पर शुभंकरी हैं
ज्ञान वैराग्य देनेवाला है रूप।
युद्ध में महत् बाण जाल देख
दुर्गा देवी के मन में क्रोध हुआ,
रोष के कारण मुखाकृति हुई
काली घटा समान श्यामा।
देह रात्रि अंधकार सम श्यामा
विशाल त्रिनेत्र केले फूल समा,
काली वेश में विराजित हुई मॉं
खट्वांग खड्ग पाश धारिणी हुई मॉं।
करालवदना घोरा मुक्तकेशी
चतर्भुजा विद्युत् माला विभूषिता,
विशाल मुख जिह्वा है लपलपाती
काल रात्रि हैं काली का ही रूप।
ये ही भद्रकाली, दक्षिण काली
मातृ काली और महाकाली ,
वक्षस्थल पर नरमुण्डों की माला
बाघ चर्म धारिणी गर्दभारूढ़ा।
मॉं का अति भयावह उग्र रूप
दुष्टों के संहार हेतु धरा यह रूप,
काल रात्रि कालकंटकघातिनी
काल रात्रि करालिका दिव्या।
भक्तों के लिये कृपामयी समृद्धिदा
रक्षा करें अग्नि जल शत्रु भय से मॉं,
आकस्मिक संकटों से भी रक्षा करें
अभयं सर्वका वरदा प्रसन्नवदना मॉं।
