“ देश की शान है ”
“ देश की शान है ”
क्या कहूँ किससे कहूँ,
कुछ समझ आता नहीं !
कैसे दिल को बहलाऊँ,
बात कोई सुनता नहीं !!
बेजान सा दिखता हूँ,
सुध मेरी है ठीक सी !
कौन क्या कर रहा ?
ज्ञात है मुझको सभी !!
उम्मीदें थीं मुझे उनसे,
मुझे नीलम कर छोड़ा !
सजाए थे सुखद सपने,
उसे पैरों से ही तोड़ा !!
पदों पर बैठकर भाषा,
का सम्मान भूल गए !
अप्रिय बात से सबको,
आघात ही करते गए !!
काम जो भी हम करें,
देश हित की बात हो !
देश का हर व्यक्ति,
हम सभी के साथ हो !!
है विविधता में एकता,
इस देश की पहचान है !
धार्मिक प्रेम सहिष्णुता,
भारत देश की शान है !!
