STORYMIRROR

Minakshi Wakode

Tragedy

3  

Minakshi Wakode

Tragedy

देश का भविष्य

देश का भविष्य

1 min
202

दरबदर भटक रहा है

अपने देश का भविष्य

लाखो जिल्लतें सह रहा है

अपने देश का भविष्य

यह जंग है 

अपनो की नजर से

अपने आप से नजर मिलाने की

अच्छे दिनो मे क्या 

बस यही दिन देखना बाकी रह गया है?

जीने की कोशिश मे हर एक दिन जिंदगी 

एक नये रूप मे दस्तक देती है

कभी भूख,शिक्षा,तो कभी जिने पे सवाल उठाती है

कहा है रोजगार,महाशक्ती के सपने

सर उठा के जीने के बुलंद रास्ते

क्या अच्छे दिनो मे अब 

रास्ते पे आना बाकी रह गया है.....


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Minakshi Wakode

Similar hindi poem from Tragedy