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अच्युतं केशवं

Abstract

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अच्युतं केशवं

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डोरी थामे हाथ जो

डोरी थामे हाथ जो

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डोरी थामे हाथ जो, उनके इंगित बाँच

जैसे भी इंगित मिले, कठपुतली तू नाच।


कठपुतली बस नाच, करे मत सोच-विचारी

दुःख को ही सुख मान, जिन्दगी कटती सारी।


किसे समय है सुने, तर्क की बातें तोरी

सच उसके ही तर्क, हाथ जो थामे डोरी।


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