मानसी मिठारी
Classics
कभी किसी के चाहत का प्रतीक हो तुम
तो किसी के नफ़रत का बहाना।
किसी मुस्कुराहट की वजह
तो कई यादों का सहारा।
कभी भगवान तक पहुँचने का जरिया
तो कभी उसकी जुबान।
मसलने पर भी महकते रहते हो
दुआ देना तो कोई तुम से सीखे।
वजह
खुदगर्ज
यह वक्त भी गु...
दास्ताँ ए फूल
हां मैं खुश हूं दर्पण ने मुझको जीना सिखा दिया। हां मैं खुश हूं दर्पण ने मुझको जीना सिखा दिया।
तो ऐसा न हो कि किसी भी व्यक्ति के पास खोने के लिए कुछ शेष ही न बचे। तो ऐसा न हो कि किसी भी व्यक्ति के पास खोने के लिए कुछ शेष ही न बचे।
मेरी जिंदगी का खूबसूरत सफर और यहीं से शुरू हुई थी मेरी कैफे की कहानी। मेरी जिंदगी का खूबसूरत सफर और यहीं से शुरू हुई थी मेरी कैफे की कहानी।
और इनका शासनकाल जो एक हजार वर्ष के भीतर ही होगा। और इनका शासनकाल जो एक हजार वर्ष के भीतर ही होगा।
श्याम तेरे चरणों में है शत शत प्रणाम, तेरे दर्शन करने हम आए गोकुल धाम। श्याम तेरे चरणों में है शत शत प्रणाम, तेरे दर्शन करने हम आए गोकुल धाम।
कसीदा हजरत बाबा साहब सोनगिरी सरकार ग्राम सोनगिरी,फतेहगढ़ जिला मन्दसौर (म.प्र.) कसीदा हजरत बाबा साहब सोनगिरी सरकार ग्राम सोनगिरी,फतेहगढ़ जिला मन्दसौर (म.प्र.)
ज़ब उसने छल से,सीता का अपहरण किया, असहनीय था उस दुष्ट रावण का ये व्यवहार। ज़ब उसने छल से,सीता का अपहरण किया, असहनीय था उस दुष्ट रावण का ये व्यवहार।
1 जय रघुनंदन राघव राम। सप्तताल प्रभेता राम। राम की गाथा, राम विधाता। 1 जय रघुनंदन राघव राम। सप्तताल प्रभेता राम। राम की गाथा, राम विधाता।
मथुरा पधारे नंदलाल देवकी माई हुई बेहाल! मथुरा पधारे नंदलाल देवकी माई हुई बेहाल!
साथ न टूटे सातों जन्म वही पवित्र बंधन जो तुम्हें बना दे मेरा। साथ न टूटे सातों जन्म वही पवित्र बंधन जो तुम्हें बना दे मेरा।
विमुख करना हो युद्ध से और खड़ा हो जा युद्ध कर।। विमुख करना हो युद्ध से और खड़ा हो जा युद्ध कर।।
धरा गर्त में सोये बीजों को प्यारी थपकी दे सहलाएगा । धरा गर्त में सोये बीजों को प्यारी थपकी दे सहलाएगा ।
तुमको चुनना होगा अपने मम्मी पापा और मुझमें से किसी एक को। तुमको चुनना होगा अपने मम्मी पापा और मुझमें से किसी एक को।
परन्तु ययाति इतने पर भी तृप्त नहीं हो सका भोगों से। परन्तु ययाति इतने पर भी तृप्त नहीं हो सका भोगों से।
प्राचीनबर्हि कहें नारद जी से कि पूरी तरह समझ में न आया। प्राचीनबर्हि कहें नारद जी से कि पूरी तरह समझ में न आया।
बेसुध हो रहा उस समय कालिय भगवान के चरणों की चोट से। बेसुध हो रहा उस समय कालिय भगवान के चरणों की चोट से।
वर मांगो जो द्रौपदी चाहती, संकोच न मन में तिल भर हो।। वर मांगो जो द्रौपदी चाहती, संकोच न मन में तिल भर हो।।
दब के मिट्टी में कई सालो से था सोया हुआ आज जागा बीज,अब जाके दरख़्त बनाएगा। दब के मिट्टी में कई सालो से था सोया हुआ आज जागा बीज,अब जाके दरख़्त बनाएगा।
श्री कृष्ण परब्रह्म हैं ये सुनकर युधिष्ठर के आश्चर्य की सीमा न रही। श्री कृष्ण परब्रह्म हैं ये सुनकर युधिष्ठर के आश्चर्य की सीमा न रही।
करुणा और मैत्री के भाव से प्रह्लाद जी तब उनसे कहें। करुणा और मैत्री के भाव से प्रह्लाद जी तब उनसे कहें।