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shekhar kharadi

Abstract

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shekhar kharadi

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चुल्हा

चुल्हा

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ठंड से मारा

चुल्हा उदास

आग से रूठी

लकड़ी गीली

बेलन से निकली

रोटी सूखी

तवे से भागी

खुशी आधी

हालत से हारी

भार्या देखी ।


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