Sonali Tiwari
Action Inspirational
आज सपने में आया
चाँद था मुझसे बोला,
तुम्हारा संदेशा मुझे मिल गया है...
चंद्रयान-3
चंद्रयान 3
दे दो पुरानी ...
कच्ची मिट्टी ...
मंजिल तक यही इंद्रधनुष लेकर जाने हैं। मंजिल तक यही इंद्रधनुष लेकर जाने हैं।
पश्चिम के गढ़ घूमर लाजवाब हैं द्वारका के प्रभु श्री कृष्ण नवाब हैं पश्चिम के गढ़ घूमर लाजवाब हैं द्वारका के प्रभु श्री कृष्ण नवाब हैं
रात दिन धरती को रोशनी देने का फर्ज, इस एक फर्ज ने दोनों के मध्य जोड़ी प्रीति। रात दिन धरती को रोशनी देने का फर्ज, इस एक फर्ज ने दोनों के मध्य जोड़ी प्रीति...
आ जाओ तुम उधर से। मगर गुजरना तो इधर से ही है। आ जाओ तुम उधर से। मगर गुजरना तो इधर से ही है।
सादगी ओढ़कर सो गई रात कल, दिन उदासी को पहने भटकता रहा सादगी ओढ़कर सो गई रात कल, दिन उदासी को पहने भटकता रहा
कल सरे राह सपनों को कुचला गया, पास लाकर भरोसे को मारा गया। कल सरे राह सपनों को कुचला गया, पास लाकर भरोसे को मारा गया।
हौंसलों की उड़ान हैं अनुभव का आधार हैं। हौंसलों की उड़ान हैं अनुभव का आधार हैं।
रेत पर मिल जाते शंख-सीप अपार गर्भ में ढोये अथाह रत्न भण्डार रेत पर मिल जाते शंख-सीप अपार गर्भ में ढोये अथाह रत्न भण्डार
स्वार्थ ने अपनी चादर ओढ़ ली क्रूरता पैर पसार रही दया की ज्योति ओझल ना हो स्वार्थ ने अपनी चादर ओढ़ ली क्रूरता पैर पसार रही दया की ज्योति ओझल ना हो
वर्षों से जो समाज, दबा कुचला था, उसके उत्थान का बीड़ा उठा लिया, वर्षों से जो समाज, दबा कुचला था, उसके उत्थान का बीड़ा उठा लिया,
बनके प्रहरी इस धरा की, प्राण अपने करूँ अर्पण। बनके प्रहरी इस धरा की, प्राण अपने करूँ अर्पण।
आज़ादी के दीप थे गाँधी रही फकीरी इनकी काया बिन शस्त्र आज़ादी दिलाई अद्भुत मति की आज़ादी के दीप थे गाँधी रही फकीरी इनकी काया बिन शस्त्र आज़ादी दिलाई अ...
पूरी दुनिया के साहित्यकारों को, एक माला में पिरो पाएगा। पूरी दुनिया के साहित्यकारों को, एक माला में पिरो पाएगा।
क्या यही है अच्छी जिंदगी, बोलने पर मिलती है मौत ! क्या यही है अच्छी जिंदगी, बोलने पर मिलती है मौत !
वह पास पहुंच कर भी कहीं भटकता दूर था ऐसी क्या बात थी जो वह हमीं से छुपाता था वह पास पहुंच कर भी कहीं भटकता दूर था ऐसी क्या बात थी जो वह हमीं से छुपाता था
स्वच्छंद व उन्मुक्त मन से जरा आज हम भी सखी री l घूम आए हम भी यह सुंदर बादलों की गलिया स्वच्छंद व उन्मुक्त मन से जरा आज हम भी सखी री l घूम आए हम भी यह सुंदर बादलों...
गुरु नाम के सिक्के चलाये, नौ सेना के जनक कहलाते थे युद्ध कलाओं में महारत हासिल, पेशे गुरु नाम के सिक्के चलाये, नौ सेना के जनक कहलाते थे युद्ध कलाओं में महारत हा...
ज्ञान अपना बढ़ाते रहे इस संसार में, सुमन खुशियों के लुटाते रहे, इस संसार में। ज्ञान अपना बढ़ाते रहे इस संसार में, सुमन खुशियों के लुटाते रहे, इस संसार में।
कहने को अब सभ्य समाज है कुछ बदला क्या विशेष नहीं केवल तरीके बदले। कहने को अब सभ्य समाज है कुछ बदला क्या विशेष नहीं केवल तरीके बदले।
असमंजस में हूँ,मैं जाऊँ या न जाऊँ ! आसमां का साथ अब छूट रहा । असमंजस में हूँ,मैं जाऊँ या न जाऊँ ! आसमां का साथ अब छूट रहा ।