चला जा रहा हूँ
चला जा रहा हूँ
नज़र आसमान पर
पाँव ज़मीन पर टिका कर
चला जा रहा हूँ
हर लम्हों में मुस्कुराकर
चला जा रहा हूँ
कहने को दिल में कई बातें है
जो फिर कभी करेंगे
किस्से भी कितने ही अनकहे है
वो किसी रोज़ कहेंगे
ऐसे ही खुद को तसल्ली दिला कर
चला जा रहा हूँ
पैरों में छाले कई हो चुके है
मंजिल के रस्ते कई खो चुके है
दिल के डर को जेबों में रखकर
हिम्मत को अपने काँधे संभाले
चला जा रहा हूँ
थक कर के मैं चूर जब भी हुआ हूँ
रुकने को मजबूर जब भी हुआ हूँ
कुछ करने की जुस्तजू में
अपनों से दूर जब भी हुआ हूँ
तब खुद को कर ज़िन्दगी के हवाले
चला जा रहा हूँ
ऐ ज़िन्दगी…
अगर जो तू चाहे तो अंजाम देदे
जिसकी ख़्वाहिश है मुझको तू वो शाम देदे
वर्ना दिन के उजाले में खुद को तपा कर
तेरे हर सितम को पीछे भूला कर
मिले हर दर्द को दिल में दबा कर
लहरों में उलझी अपनी कश्ती संभाले
चला जा रहा हूँ
खुद को कर ज़िन्दगी के हवाले
चला जा रहा हूँ
