Shailaja Pathak
Comedy
वो घूम रहा था मेरे सर पे,
सुदर्शन चक्र की तरह,
ना खुद सो रहा था,
ना मुझे सोने दे रहा था।
रामायण में मह...
मै नदी हूं
बोलो ना
अंगूठी
मेरा चांद
रेल की पटरी
कृति
मैं और तुम
अंगारे
यादें
ये आजकल की पीढ़ी का, जाने ध्यान कहां रहता है? ना कीमत वक्त, पैसे या मेहनत की! ये आजकल की पीढ़ी का, जाने ध्यान कहां रहता है? ना कीमत वक्त, पैसे या मेहनत की!
ये तुम्हारी या मेरी नहीं अपनी, है ये कहानी घर-घर की। ये तुम्हारी या मेरी नहीं अपनी, है ये कहानी घर-घर की।
इस कल्पवृक्ष का हर कोई अभिन्न अंग है, बांध कर रखे हैं हमें प्यार, आदर और सत्कार। इस कल्पवृक्ष का हर कोई अभिन्न अंग है, बांध कर रखे हैं हमें प्यार, आदर और सत्क...
सम्राज्ञी बनकर बैठी हमको अपने इशारों पर नचाती, सम्राज्ञी बनकर बैठी हमको अपने इशारों पर नचाती,
चुटकियों में मिल जो रहा है, तभी तो वो मुझे अपना गुरु मानने लगा है। चुटकियों में मिल जो रहा है, तभी तो वो मुझे अपना गुरु मानने लगा है।
बैठे बैठे एक दिन दिमाग में एक बात गूंजी फेसबुक पे लोगों से हंसी दिल्लगी की सूझी। बैठे बैठे एक दिन दिमाग में एक बात गूंजी फेसबुक पे लोगों से हंसी दिल्लगी की ...
कल रात पूजा पंडाल मेंं अजीब बात हो गई। कल रात पूजा पंडाल मेंं अजीब बात हो गई।
न यह शिवशंभु का चिट्ठा न परसाई जी का व्यंग न यह शिवशंभु का चिट्ठा न परसाई जी का व्यंग
एक पहुंचे हुए संत प्रवचन सुना रहे थे "अज्ञानी" जनता को "मोक्ष" सिखला रहे थे। एक पहुंचे हुए संत प्रवचन सुना रहे थे "अज्ञानी" जनता को "मोक्ष" सिखला रहे थे...
आप दोनों में ये अनुपम सामंजस्य हो ये अजूबा हो ही नहीं सकता है। आप दोनों में ये अनुपम सामंजस्य हो ये अजूबा हो ही नहीं सकता है।
मज़ाक और रसमलाई दोनों का हिसाब बराबर चुकाया। मज़ाक और रसमलाई दोनों का हिसाब बराबर चुकाया।
द्वार खड़ी माँ अब आरती उतारती, वीर बढ़ो माँ अब नित हैं पुकारती। द्वार खड़ी माँ अब आरती उतारती, वीर बढ़ो माँ अब नित हैं पुकारती।
प्रभु! क्षमा चाहता हूं आना तो मैं दिन में ही चाहता था, प्रभु! क्षमा चाहता हूं आना तो मैं दिन में ही चाहता था,
बादल को प्रतीक बनाकर वर्तमान परिवेश पर चोट करता एक गीत बादल को प्रतीक बनाकर वर्तमान परिवेश पर चोट करता एक गीत
बहुत दिनों से मैं सोच रहा था कि काश! मैं भी भगवान होता। बहुत दिनों से मैं सोच रहा था कि काश! मैं भी भगवान होता।
रावण की जगह लेने की कोशिश भी न करो, रावण की जगह लेने की कोशिश भी न करो,
प्यार से समझाने की बहुत कोशिश की रह-रहकर, मगर सब बेकार, बस बैठी थी वह एक ही रट लगाकर प्यार से समझाने की बहुत कोशिश की रह-रहकर, मगर सब बेकार, बस बैठी थी वह एक ही र...
निष्ठुर भाव से उन्होंने मना कर दिया फिर मैंने इस तरह आने का कारण पूछा निष्ठुर भाव से उन्होंने मना कर दिया फिर मैंने इस तरह आने का कारण पूछा
दूसरों के पैरों की ठोकर खाने के लिए वहीं पड़ा रहने दिया दूसरों के पैरों की ठोकर खाने के लिए वहीं पड़ा रहने दिया
सालियों द्वारा जूते चुराने के भरपूर प्रयास किए जा रहे थे, सालियों द्वारा जूते चुराने के भरपूर प्रयास किए जा रहे थे,