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darshit vasani

Romance


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darshit vasani

Romance


चाहत है हमारी ।

चाहत है हमारी ।

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यार यह कोई !

अपना सा मिलता ही नही है , 

बस तू मिल जाए यही चाहत है हमारी।


यार बात हर कोई!

अपनी वाली से हरदम करता है,

थोड़ी सी बात करने की भी चाहत है हमारी।


यार वो दोनों कैसे !

हाथों में हाथ डाले चलते हैं ,

बस ऐसे ही साथ चलने की चाहत है हमारी।


यार तू भले ही !

खिड़की से बारिश को देख,

उस बारिश में भीगने की चाहत है हमारी।


यार तू कितनी ! 

भी बातें एक साथ कर ले,

बस यूँही सुनते रहने की चाहत है हमारी।


यार यू तो में !

चाँद नहीं हूं, पर कहोगे एक बार

तो अमावस में भी मिलने की चाहत है हमारी।


यार ये सब !

तुम पढ़ लेना, क्योंकि साथ

ज़िन्दगी सारी गुज़ारने की चाहत है हमारी।


 

           



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