बुखार ए इश्क़
बुखार ए इश्क़
अर्ज़ हो रहे हर नज़्म में,
बस तारीफ़ उनकी ही हो रही।
दिल ए दामन में उनकी ही,
आवाज़ आज गूंज रही।
नींद आज रैन से रूठी,
ख़्वाब नैन से रूठ गई।
ना जाने दिल के दामन में,
किसकी तस्वीर बन गई।
शायद बूंदों की बौछार में,
जो परी हमसे रूबरू हुई,
जादू चलाकर,
नज़ाकत से,
इस दिल को चुरा ले गई।
हो गया है इश्क़ हमें,
प्यार का खुमार चढ़ रहा।
भीग कर मोहब्बत की बरसात में,
बुखार ए इश्क़ हमें हो गया।

