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Rajesh kumar sharma purohit

Abstract

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Rajesh kumar sharma purohit

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बीती रात कमल दल फुले

बीती रात कमल दल फुले

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आशाओं के कमल हम भूले

बीती रात कमल दल फूले


उम्मीदों को रख ताक में

आओ कर्मपथ को चुने


होंसलों के पंख लगा

दूर गगन को आओ चूमें


बरसों से राह देखती

देहरी लगती सुनी


खोल कपाट अंतर के

बीती रात पुष्प फुले।


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