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Prem Thakker

Romance

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Prem Thakker

Romance

बहाना

बहाना

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सुनो दिकु......

एक समय था जब यह मौसम बड़ा सुहाना लगता था

तुम्हारे साथ लम्हें बिताने का यह एक बहाना लगता था


तुम्हारी वोह मीठी बातें

जिस में हम सदा ही खो जाते

मानों वह सीधा दिल पर लग जाये

ऐसा एक निशाना लगता था

तुम्हारे साथ लम्हें बिताने का यह एक बहाना लगता था


वोह मेरा देर से ऑफिस पहुंचना

कुछ लम्हें साथ बिताने के लिये

सब की नज़रों से बचना

सभी स्टाफ के सामने में मजनू दीवाना लगता था

तुम्हारे साथ लम्हें बिताने का यह एक बहाना लगता था


की कब तक इन यादों के सहारे जियूँगा

कब तक हमारी जुदाई की आग में यूं जलूंगा

अब नही मन करता रहने का तन्हाई में

तुम संग ही जीवन सुहाना लगता था

तुम्हारा साथ ही मुझे जीवन जीने का बहाना लगता था

प्रेम का इंतज़ार अपनी दिकू के लिये।


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