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Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

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Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

"भाई दूज"

"भाई दूज"

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जब श्री कृष्ण ने नरकासुर का किया वध

और फिर घर को आये, श्री कृष्ण सकुशल

तब बहिन सुभद्रा ने उनके लगाया तिलक

ओर बांधा था रक्षा सूत्र का अभेद्य कवच


तब से मनाने लगे, भाईदूज का पवित्र पर्व

दीपावली के दूसरे दिन आता, भाई दूज पर्व

इस दिन सब बहिनें, भाइयों पर करती है, गर्व

बहुत सी बहिनें, व्रत करके मनाती यह पर्व


भाइयों की कुशलक्षेम हेतु, जलाती दीपक

बहिनें, रब से नित करे, प्रार्थना, भाई रहे, स्वस्थ

भाईदूज, भाई-बहिन का है, एक पवित्र उत्सव

हर बहिन, बांधती रक्षा सूत्र का अभेद्य कवच


यम द्वितीया भी कहलाता है, यह भाईदूज पर्व

जो सच्चे हृदय से मनाता है, यह भाईदूज पर्व

यमराज का आशीर्वाद रहता है, सदा उसके सर

आज दीपक जलाने से, मिटता अंधकार भीतर


आओ एक भाई, फ़ौजियों को भी मान जाये

हम घरों में सुरक्षित रहते है, जिनकी बदौलत

वो कृष्ण जैसे हर बहिन के है, पवित्र रक्षक

बहिनों, फ़ौजियों के लिये जलाये, एक दीपक।




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