STORYMIRROR

Sudhir Srivastava

Abstract

3  

Sudhir Srivastava

Abstract

भाग्य रेखा

भाग्य रेखा

1 min
209

खुद में विश्वास की

नींव मजबूत कीजिए,

अपने पुरुषार्थ पर

यकीन कीजिये।

भाग्य तो सिर्फ

मन बहलाने का

साधन मात्र है,

यकीन न हो तो

पुरुषार्थ करके देखिए।


भाग्य भी आपके

साथ सदा रहता कहाँ है?

बस यकीन कीजिए

आगे बढ़िए,

अपने पुरुषार्थ को

जागृति कीजिए।

यकीन मानिए

आपका भाग्य बदल जायेगा,

भाग्य भी भय से

आपके हाथों की

लकीरों में सिमटकर 

आपकी भाग्य रेखा बन जायेगा ।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract