Abhishek Singh
Abstract
क्या करूँ तेरा,
ऐ ज़िंदगी।
इस पल ख़ुशी,
तो अगले पल,
ग़म ले आती है।
ना चाहते हुए भी,
मुझको रिझाती है।
बीते वक़्त याद दिला,
मुझको रुलाती है।
तुझको मुझसे वफ़ा नहीं,
या तूँ है बेवफ़ा।
जो पल पल में याद,
उनकी साथ ले आती है।
विश्वास
उसकी चुनरी..!
एक रात दे रहा...
वो जो ख़फ़ा ह...
समुद्र एक कवि...
मेरा कुछ सामा...
एक और दामिनी
जय जवान जय कि...
महामारी
कोरोना वारियर...
कुत्ते के बाहर किताब इंसान की सबसे अच्छी दोस्त होती है, एक कुत्ते के अंदर पढ़ने के लिए कुत्ते के बाहर किताब इंसान की सबसे अच्छी दोस्त होती है, एक कुत्ते के अंदर पढ़...
केवल आदमी ही क्यों ? औरत - बच्चें ! लड़के लड़कियां सभी हैं, अनजान बेचारे।। केवल आदमी ही क्यों ? औरत - बच्चें ! लड़के लड़कियां सभी हैं, अनजान बेचारे।।
बन न्यायकारी राजा देवभूमि के, करना निवास सदा साथ हमारे।। बन न्यायकारी राजा देवभूमि के, करना निवास सदा साथ हमारे।।
भाग गया अकबर अपनी सब सेना ले लाहौर की ओर फिर ना देखा उसने जीवन भर मेवाड़ की ओर। भाग गया अकबर अपनी सब सेना ले लाहौर की ओर फिर ना देखा उसने जीवन भर मेवाड़ की ओर...
स्वतंत्रता के बिना अधूरा है यहाँ, हर जीव, हर इंसान। स्वतंत्रता के बिना अधूरा है यहाँ, हर जीव, हर इंसान।
आत्मिक विकास के लिए इस जीवन को इसकी आवश्यकता के लिए सहजता से जीना जरूरी है। आत्मिक विकास के लिए इस जीवन को इसकी आवश्यकता के लिए सहजता से जीना जरूरी है।
सत्ता के गुंडों से लड़ती हुई भाषा उठ रही है वह एक अर्थ से सारे महादेश को जोड़ देगी। सत्ता के गुंडों से लड़ती हुई भाषा उठ रही है वह एक अर्थ से सारे महादेश को जोड़ द...
अब, मुझमें, मेरे हर अंदाज में, हर पल में, मेरे हर काम में, बस तू ही नजर आती हैं माँ अब, मुझमें, मेरे हर अंदाज में, हर पल में, मेरे हर काम में, बस तू ही नजर आत...
क्योंकि वो छोटी सी अच्छाई जो मुझमें है, वो झूठी नहीं है। क्योंकि वो छोटी सी अच्छाई जो मुझमें है, वो झूठी नहीं है।
शायद पहली दफे इंद्र के आदेश की अनदेखी कर वह उस किसान के ऊपर "अमृत" बन बरसा। शायद पहली दफे इंद्र के आदेश की अनदेखी कर वह उस किसान के ऊपर "अमृत" बन बरसा।
हर रंग ज़िन्दगी का जीते हुए ही हमें, पूरा करना है सफ़र। हर रंग ज़िन्दगी का जीते हुए ही हमें, पूरा करना है सफ़र।
पानी है सफलता जो तुमको तो खुद को तुम आजाद करो। पानी है सफलता जो तुमको तो खुद को तुम आजाद करो।
झाँकी के चंदे का दो नंबरी धन्धे का कोई भरोसा नहीं! झाँकी के चंदे का दो नंबरी धन्धे का कोई भरोसा नहीं!
सस्नेह, ✍राजीव जिया कुमार, ... सस्नेह, ✍राजीव जिया कुमार, ...
जिसका नाम ही अतिसुन्दरी हो तो वह असल देखने मे भी काफी सुंदर होगी। जिसका नाम ही अतिसुन्दरी हो तो वह असल देखने मे भी काफी सुंदर होगी।
क्या रास बिहारी की दुल्हन कभी इस कोमा से जागेगी ? क्या रास बिहारी की दुल्हन कभी इस कोमा से जागेगी ?
जेठ की ज्वाला तपती धरती प्यासी धरती बेहाल इंसान।। जेठ की ज्वाला तपती धरती प्यासी धरती बेहाल इंसान।।
कितने घर उजड़ जाते दंगों के नाम पर कितने रिश्ते जल जाते हैं, खत्म करना है यह भेदभाव तो कितने घर उजड़ जाते दंगों के नाम पर कितने रिश्ते जल जाते हैं, खत्म करना है यह ...
वेसे ही बिना पिता नाम के छठ के बिना लाइफ़-लाइफ़ नहीं होता। वेसे ही बिना पिता नाम के छठ के बिना लाइफ़-लाइफ़ नहीं होता।
दिन भी खामोश है खामोश है ये रातें खामोशियों की धूप, खामोशियों की बरसातें। दिन भी खामोश है खामोश है ये रातें खामोशियों की धूप, खामोशियों की बरसातें।