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Shravani DNG

Abstract

3  

Shravani DNG

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बेटियां

बेटियां

2 mins
204


शिकायते तो मुझे भी बहोत थी,

पर जाहिर करना मैंने ज़रूरी समझा नहीं !

दुनिया ने दी मिसालें कई ,

पर प्यार से बड़ा कैसे है पैसा,

ये सवाल दिल को साला कभी सुलझा नहीं !!


झगड़ा करती भी तो किससे !

सब अपने ही थे मेरे हिस्से !!

देखके घरवालों का दुःख,

अपने हर गम को मै छोटा समझती थी !

जो अरमान आते थे दिल में,

उने मैं इन हाथों से झटकती थी !!


ये लड़ाई दुनिया के लिए,

दो जातियों की झड़प थी !

पर मेरे लिए तो ये दो दिलोंको जोड़ती,

एक कच्ची सड़क थी !

मुझे सारी रसमे पुरे डिगनिटी के साथ निभानी थी !

वो कच्ची सड़क मुझे अपने प्यार

और मेंहनत से पक्की बनानी थी !!


मन है कुछ ऐसा कर जाये !

के हमारे बाद कोई इतना न सहने पाए !!

हर लड़की को हख हो,

की अपना जोड़ीदार वो खुद चुने !

अपने भविष्य के सपने वो

पूरी आत्मविश्वास से बुने !!


चाहे जितने कायदे बन जाये

बेटीयो के लिए इस दुनिया में,

वो आपसे आपकी जायदात नहीं मांगती है !

बस अपने और अपने जोड़ीदार के लिए,

दिल में थोड़ा प्यार और आंखो में इज्जत मांगती है !!

आपकी बड़ी सी दुनिया में

उसके लिए एक जगह चाहती है !!!


मुझ जैसे जो लोग,

नदी के इस पार से केह रहे !

तकलीफ जो मेरे माँ बाप भाई

बहन उस पार सेह रहे, !

दुनिया को ये समझना होगा !

आज जहा मेरा परिवार खड़ा है,

कल वहा उनका खड़ा होगा, !


वही घड़ी और वही कांटे होंगे,

पर समय बदल जायेगा !

वही जमी और वही आसमान होंगे,

पर जमाना बदल जायेगा !!

जो घड़ी आज के समय में

गलत बताई जाती है,

वो समय कल की घड़ी

में सही बताया जायेगा !!!


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