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Nitu Rathore Rathore

Abstract Inspirational Children

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Nitu Rathore Rathore

Abstract Inspirational Children

****बेटियां****

****बेटियां****

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दीप आशाओं के मन में जब जलाती हैं बेटियाँ

गीत खुशियों के सबसे गुनगुनाती हैं बेटियाँ।


जीत की चाहत न उसको अब न तो गम हारने का

खुद उमंगें आज अपनी नई जगाती हैं बेटियाँ।


खिलने से गुलशनों में फूल आती हैं बहारें

राह भटके हुए राही को दिखाती हैं बेटियाँ।


सुख दुख में साथ मां बाबा के रहती हैं वो हरदम

मुस्कुराते हुए तन- मन को लुभाती हैं बेटियाँ।


लोरियाँ सुनती थी माँ की वो कैसे बढ़ती चली गई

चाँदनी सी छत पर आकर अब खिलखिलाती हैं बेटियाँ।


मैं बनूंगी मां तेरी ही देह से हर बार सुन ले

आऊंगी अगले जन्म में कह के जाती हैं बेटियाँ।


सकुचाती है लजाती कह नहीं पाती किसी से

जब नीतू मन मीत के सपने सजाती हैं बेटियाँ।


बेटी दिवस की शुभकामनाएं सभी को


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