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कल्पना रामानी

Inspirational

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कल्पना रामानी

Inspirational

बेटी बचाएँ

बेटी बचाएँ

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ज़मीं से उठाकर फ़लक पर बिठाएँ

अहम लक्ष्य हो, आज बेटी बचाएँ।


जहाँ घर-चमन में, चहकती है बेटी

बहा करतीं उस घर, महकती हवाएँ।


क़तल बेटियाँ कर, जनम से ही पहले

धरा को न खुद ही, रसातल दिखाएँ।  


बहन-बेटी होती सदा पूजिता है

सपूतों को अपने, सबक यह सिखाएँ। 


पढ़ाती जो सद्भाव का पाठ जग को

उसे बंधु! बेटे बराबर पढ़ाएँ।


न हो जननियों, अब सुता-भ्रूण हत्या

वचन देके खुद को अडिग हो निभाएँ।   


है सच “कल्पना” बेटी बेटों से बढ़कर

कि अब भेद का भूत, भव से भगाएँ। 


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