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सुरशक्ति गुप्ता

Abstract

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सुरशक्ति गुप्ता

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बेजुबां

बेजुबां

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आओ मरहम बन जाते हैं

उन जख्मों के

अत्याचारों से

वक्त बेवक्त के 

शागिर्द विचारों से

जिनकी दवा केवल चिन्तन है ।

उनके अकिंचन प्यार से 

उस दर्द की तपन को 

कम कर जाते हैं 

आओ बेजुबांन बन जाते हैं......


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