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Jyoti Khari

Tragedy Inspirational

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Jyoti Khari

Tragedy Inspirational

बेजुबां जीव...!!!

बेजुबां जीव...!!!

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बेजुबां की है एक दास्तां 

था कुछ ऐसा उसके जीवन का कारवां

रोज आता है वह घर पर

स्नेह पूर्ण आंखों से है देखता

रोटी की आस लेकर वह हमारे दर पर बैठता

चोट लगने पर वह हमारे पास आ जाता था

बिना कुछ बोले वह कुछ इस तरह अपना दर्द बयां कर जाता था

इंसान को सब कुछ मिल जाए

कभी खुश नहीं होता

जरा जानवरों से सीखिये

जो इंसानों की तरह सभी को दिखाकर नहीं रोता

हम अपनी स्वतंत्रता से कभी ना हुए खुश

वो जीवन भर परतंत्र होकर भी

ना की शिकायतें न हुए मायूस

हम बोलते हैं, हम करते हैं अपनी भावनाएं व्यक्त परंतु आज खुद से पूछिए

हम जानवरों के प्रति क्यों इतने सख्त

वह बोल नहीं सकते

इसीलिए हम समझते हैं उन्हें निर्जीव

उनके बिना पृथ्वी ना होगी कभी सजीव

आखिर वह भी है इस पृथ्वी के जीव

याद रखें ईश्वर ने हमें एक समान बनाया है

गर वह ना हो तो

रह जाएगा पृथ्वी पर सिर्फ स्वार्थियों का साया है दिल है, दिमाग है

फिर भी समझ नहीं पाता इंसान उनका दर्द

क्यों बन नहीं पाता

इंसान उनका हमदर्द

गर है जज्बात

क्यों समझ नहीं पाता उनकी बात

हम कहते हैं खुद को समझदार

पर क्यों नहीं होता उनके दर्द का आभास

याद रखिए

उनसे हमारा जीवन है, हम प्राणी उनके कर्जदार हैं असल में

इंसान कहलाने के योग्य है वो

वो ही इसके हकदार है

कभी सोचा है

उनके लिए वह पल कितना भारी होगा

जब मनुष्य काल बनकर

जानवरों को गाड़ी से रौंद देते हैं

कितने कष्ट, कितनी यातनाएं हम उन्हें देते हैं

वह चुपचाप

बस हम इंसान ने जो दिया

वो दर्द सहते हैं

सोचो पता चलेगा

वो कितना तड़पता होगा

आखरी वक्त उसके मुख से क्या निकलता होगा क्यों नहीं समझते हम इंसान

उनको भी तकलीफ होती है

उनका भी घर परिवार है उनको भी जीने की आस है 

क्यों खो रहे हम इंसान

उनको जो हम पर विश्वास है

दर्द में रहते हैं ये

इन्हें समझो

तो कितना कुछ कहते हैं ये

इंसान अपनी इंसानियत से दूर है

फिर भी रखते ये हमें महफूज है

इतना होने पर तो कोई भी रोने लगे

फिर भी अगर किसी को कोई भी फर्क ना पड़े समझ लेना

इंसान अपनी इंसानियत खोने लगे

इनकी आंखों में आंसू

चेहरे पर मासूमियत

 फिर भी हम क्यों नहीं देते हैं अहमियत

यह कड़वा सच है

लेकिन सच तो आखिर सच है

मर चुकी है इंसान के अंदर की इंसानियत...!!!! 



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