बदसूरत या ख़ूबसूरत
बदसूरत या ख़ूबसूरत
है नहीं वश शारीरिक रचना पर अपना,
प्रभु की रचना है मानव गोरा, काला,
लम्बा, नाटा, या फिर नैन नक़्श,
करते निर्माण व्यक्तित्व का सब अपना।
कोई कहलाता सुन्दर तो कोई बदसूरत,
है मापदण्ड व्यक्तिपरक,
हो जाता मोहित कोई किसी के शारीरिक सौन्दर्य पर,
तो वही दूसरे के लिये है साधारण या बदसूरत,
हो जाता मोहित कोई किसी के व्यक्तित्व पर,
तो है किसी के लिये वह साधारण व्यक्तित्व।
ख़ैर है पसन्द अपनी अपनी,
परन्तु नहीं है अधिकार किसी को भी करने का ,
टीका टिप्पणी किसी की सूरत या सीरत पर,
फिर भी नहीं मानते कुछ असभ्य टिपण्णी बिना किये,
नहीं रखते ध्यान देश की गरिमा और मर्यादा का,
कह अपशब्द करते चेष्टा करने का अपमान,
वास्तव वे करते प्रदर्शन अपनी अयोग्यता का।
हैं अधिकांश जनता मोहित उन पर,
जूझती रहीं सदा प्रतिकूल परिस्थितियों से,
देती रहीं मात हर उस रोड़े को जो आये राह में उनकी,
हैं भंडार ज्ञान का फिर भी हैं जुड़ी धरती से,
हैं असाधारण व्यक्तित्व की धनी,
है गर्व सम्पूर्ण विश्व को उन पर,
हैं साधारण सी दिखने वाली वह महिला,
फिर भी हैं सबसे ख़ूबसूरत महिला वो भारत की,
हैं आज राष्ट्रपति विश्व के सबसे बड़े,
लोकतांत्रिक देश भारत की द्रौपदी मुर्मू जी,
है शत शत नमन उन्हें हमारा।
