Antariksha Saha
Abstract
हम बदजबान थे
बदनाम नहीं
ईमान थी तू
बस यह
गलती कर बैठे।
मूरत
घाव कुछ गहरे ...
ख़ामोशी
मजदूर
झूठी मुस्कान
लक्ष्य
फ़ोन नंबर
मीठी चासनी
घर
angrayian
धरती उसकी पाताल उसका उसकी ही हुकूमत समुद्र में धरती उसकी पाताल उसका उसकी ही हुकूमत समुद्र में
किसी पर जुल्म होते देख, किसी को दया नहीं आती है देख कर भी अनदेखा जैसे करते हैं किसी पर जुल्म होते देख, किसी को दया नहीं आती है देख कर भी अनदेखा जैसे करते है...
पिता का त्याग अनुपम अनमोल जिसने लायक बनाया हमें तौल पिता का त्याग अनुपम अनमोल जिसने लायक बनाया हमें तौल
उसके होने से घर का हर कोना उज्ज्वल न होने पर आँखें होती जल-थल उसके होने से घर का हर कोना उज्ज्वल न होने पर आँखें होती जल-थल
चुप रहना भी एक तरह का हथियार है चुप रहना भी एक तरह का हथियार है
आंखों में उसके मैं वर्षों से खटक रहा हूं, आंखों में उसके मैं वर्षों से खटक रहा हूं,
काट काट कर जंगल सारा साफ तो तूने कर ली! काट काट कर जंगल सारा साफ तो तूने कर ली!
सुनो मेरे मायके भी बोल दो इस बार भी ना आ पाऊँगी.. सुनो मेरे मायके भी बोल दो इस बार भी ना आ पाऊँगी..
सदा ना विपदा रह सके, सदा ना सुख भी होय। सदा ना विपदा रह सके, सदा ना सुख भी होय।
दान दहेज़ में लिपटी विदाई की घड़ी सबसे महंगी, जिसमें न्योछावर माँ-बाप की ज़िन्दगी भर की प दान दहेज़ में लिपटी विदाई की घड़ी सबसे महंगी, जिसमें न्योछावर माँ-बाप की ज़िन्दग...
संपूर्ण विश्वास के साथ निभाने लगी जाते हैं संपूर्ण विश्वास के साथ निभाने लगी जाते हैं
मोर आँसू टपका रहे हैं अपने पाँवों को देख कर मोर आँसू टपका रहे हैं अपने पाँवों को देख कर
टूटते सपने लावारिस हालतों में बेघर बेसहारा बच्चे टूटते सपने लावारिस हालतों में बेघर बेसहारा बच्चे
होता पांच वर्ष में ऐसा ही, ये है चुनाव का दौर। होता पांच वर्ष में ऐसा ही, ये है चुनाव का दौर।
दर दर भटक रहे होते एक एक बूंद रक्त की भीख मांग रहे होते दर दर भटक रहे होते एक एक बूंद रक्त की भीख मांग रहे होते
किस्मत बहुत खेल खेलती है कभी बहुत रुलाती है तो कभी हंसाती है किस्मत बहुत खेल खेलती है कभी बहुत रुलाती है तो कभी हंसाती है
सारे फूल लगते है जैसे तूने लिखा हमें खत, फूल की खुशबू जगाती है हमें दिल में लगन। सारे फूल लगते है जैसे तूने लिखा हमें खत, फूल की खुशबू जगाती है हमें दिल में ...
जीना जीना वो है कैसा ये मेरा खाली खाली पन रह गया अकेला जीना जीना वो है कैसा ये मेरा खाली खाली पन रह गया अकेला
यह हमारी आपकी ही नहीं हर प्राणी की कहानी। यह हमारी आपकी ही नहीं हर प्राणी की कहानी।
हमारी संस्कृति में प्रकृति प्रदत्त हर वस्तु पूजी जाती है, हमारी संस्कृति में प्रकृति प्रदत्त हर वस्तु पूजी जाती है,