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Gaurav Sharma

Inspirational

2.8  

Gaurav Sharma

Inspirational

बदलती दुनिया

बदलती दुनिया

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देखकर बदलती दुनिया...

देखता रह गया...

हर पल के रंग निराले...

अजब लोग अजब सियासत वाले,

मैं करता रहा घुलने की कोशिश पर अलग-सा रह गया...

देखकर बदलती दुनिया...

सोच का दायरा मैंने बदलते देखा प्रेम की सीमा को मैंने सिमटते देखा...

देखा गैरों को साथ खड़े अपनो को मुँह फेरते देखा...

बदलते रिश्ते देखकर मै देखता ही रह गया...

देखकर बदलती दुनिया...

एक तेरे ना होने से दुनिया मेरी खाली है...

तलाशती तुझे नज़रे बनकर सवाली है...

तू बनकर खाक कहीं मुझमे शामिल-सा हो गया

देखकर बदलती दुनिया मैं देखता...


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