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Sonam Kewat

Abstract

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Sonam Kewat

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बदलता जमाना

बदलता जमाना

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एक वो जमाना था जब लोग

सपनों में मिला करते थे और

एक आज का जमाना है कि

आनलाइन मुलाकातें होती है।

एक वो जमाना था जब लोग

मोहब्बत भुलाये नहीं भूलते थे।

एक आज का जमाना है कि

नंबर डीलीट करते ही भूल जाते हैं।

एक वो जमाना था जब लोगों की

मुलाकात आखिर दम तक होती थी।

एक आज का जमाना है कि

पहली मुलाकात आखिरी हो जाती है।

एक वो जमाना था जब लोग

दिल मिलने पर प्यार करते थे।

एक आज का जमाना है कि

लोग शक्लें मिलाया करते हैं।

एक वो जमाना था जब लोग

दूरियों में अपनापन बढता था।

एक आज का जमाना है कि

अपनों में दूरियाँ बढ़ रही है।

बदल रहा है ये जमाना या

जमाने को हम बदल रहें हैं?

ठहरा रहा वो जमाना वहीं पर

हमारे जीने के ढंग बदल रहें हैं।



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