बदला मौसम
बदला मौसम
वक़्त बदला मौसम बदला
तुम भी बदले मैं भी बदली
बदला नहीं अगर कुछ
वह एक हल्का,मीठा
दर्द भरा एहसास
वह कसक
तुम्हें पाने की,फिर खोने की
दोनों ही न थे हमारे हाथ
हूं शुक्रगुज़ार मगर आज भी
उन ख़ूबसूरत पलों के लिए
गुज़रे जो तुम्हारे साथ
आयेंगे न वापस वह दिन
मगर यादें कब बिछुड़ी हमसे
जो मिला जितना मिला
वह अपना था
जो वक़्त अपना न था
उसका अब नहीं ग़म
मगर वह हल्की,मीठी दर्द भरी टीस
वह कसक कहां जाए ?
तय हुआ बन मेरी मेहमान
मेरे साथ ही रह जाए !

