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Meena Mallavarapu

Abstract Romance

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Meena Mallavarapu

Abstract Romance

बदला मौसम

बदला मौसम

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वक़्त बदला मौसम बदला

 तुम भी बदले मैं भी बदली

बदला नहीं अगर कुछ

वह एक हल्का,मीठा

दर्द भरा एहसास


वह कसक

तुम्हें पाने की,फिर खोने की

 दोनों ही न थे हमारे हाथ

हूं शुक्रगुज़ार मगर आज भी

उन ख़ूबसूरत पलों के लिए

गुज़रे जो तुम्हारे साथ


आयेंगे न वापस वह दिन

मगर यादें कब बिछुड़ी हमसे

जो मिला जितना मिला

वह अपना था


जो वक़्त अपना न था

 उसका अब नहीं ग़म

 मगर वह हल्की,मीठी दर्द भरी टीस

वह कसक कहां जाए ?

 तय हुआ बन मेरी मेहमान

 मेरे साथ ही रह जाए !


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