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Hardik Mahajan Hardik

Abstract

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Hardik Mahajan Hardik

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बदल रहा हूँ

बदल रहा हूँ

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बदल रहा हूँ मैं तुम्हारे साथ जीवन के हर इक पल में।

बदल रहे हो क्या तुम मेरे जीवन के हर इक कल में।


थाम रहा हूँ मैं तुम्हारे साथ जीवन के हर इक क्षण में।

अपना पल तुम्हारे साथ ज़िन्दगी के हर इक कण में।


समय सही मैं तुम्हारे साथ जीवन के हर इक युग में।

उतर रहा मैं तुम्हारे आज जीवन के हर इक जग में।


वक़्त अभी हैं हार्दिक यह जीवन के हर इक जद में।

काश सम्भल जाए सब ये जीवन के हर इक कद में।


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