STORYMIRROR

हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Inspirational Children

3  

हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Inspirational Children

बचपन

बचपन

1 min
139


याद आती हैं बचपन की वो शरारतें 

खिलंदड़ जिंदगी और बेपरवाह आदतें 

ना कोई गम ना उदासी ना कोई चिंता थी 

आंखों में रंगीन सपने आसमां छूने की बातें 

पैरो में चक्कर और होंठों पे शक्कर होती थी 

प्रेम का समंदर वात्सल्य की बरसात होती थी 

मासूमियत के रंग में हर रंग घुल जाया करता था 

नन्हे मस्तिष्क में कल्पनाओं की उड़ानें जवान होती थी 

पढ़ने लिखने खाने पीने खेलने कूदने में समय कटता था 

जिंदगी का हर सुख हमारे सिरहाने पर हुआ करता था 

कितने अमीर थे तब , बड़ी शाही जिंदगी जिया करते थे 

वो अविस्मरणीय अवर्णनीय हमारा बचपन हुआ करता था 


श्री हरि 



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational