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Gazal Hindustani

Children

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Gazal Hindustani

Children

बचपन

बचपन

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ढूंढता हूँ नादानी

पर अब मिलती नहीं है,

चेहरे की मासूमियत

भी अब चलती नहीं है।


अब छोटी सी भूल भी 

मेरी गलती रही है,

अब शरारतें किसी को

मेरी खलती नहीं है।


अब कोई भी ज़िद

मुझे जल्दी नहीं है,

सुबह के दूध में मेरे

अब हल्दी नहीं है।


कलम के सिवा मेरी

कुछ चलती नहीं है,

मेरे बचपन की शाम 

गज़ल जल्दी ढली है।

 


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