अयोध्या
अयोध्या
अयोध्या अब लंका सी लग रही है
अपने प्रभु श्रीराम को ही ठग रही है
कितनों को व्यापार मिला कितनों को रोजगार
इसीलिए शायद गुंडों, माफियाओं को चुन रही है
खोया वैभव फिर से स्थापित हुआ है विश्व में
छोटे मन में इतनी बड़ी बात नहीं पच रही है
रामराज्य से आजिज आ गये हैं शायद ये लोग
गुलामी की जिंदगी की हूक मन में उठ रही है
चमन बनाने में सब कुछ दांव पर लगा दिया था
शायद उसी की सजा भले मानुषों को मिल रही है।
