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V. Aaradhyaa

Inspirational

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V. Aaradhyaa

Inspirational

अवसरवादी

अवसरवादी

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आज लगा झूठ का हर जगह देखो मेला,

सियासत में होता जंग बहुत कैसा ये खेला !


हजारों की जो बात करते रहते है हरदम,

जेब में उनके नहीं दिखता कोई एक धेला !


हक़ीक़त नहीं है यहाँ जानता आज कोई,

बदलते जा रहे हैं चाहे गुरु हो या हो चेला !


जमा हुई चौकड़ी खूब आज स्वार्थियों की,

सभी बाँध रहे झूठ का अपने सिर पे सेला !


अवसरवादी से हो गए आज सब नेतागण,

हज़म कर गये सब मिलक़र रिश्वत का भेला !


गये न्याय को माँगने लोग दर पर भी जिनके,

मिला नहीं न्याय, और ऊपर से डंडों को झेला !



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