औरतें हिसाब-किताब में पक्की
औरतें हिसाब-किताब में पक्की
" पैसे की फितरत है कि... जमा करने में सालों लग जाते हैं और अगर खर्चो तो चुटकियों में खर्च हो जाते हैं ! "
दोनों पति पत्नी यही कोशिश करते थे कि... जितनी आमदनी हो , उतने में ही सारे खर्चे निपट जाएं। किसीसे माँगने की नौबत ना आए।
लीना और अमित बहुत किफायत से घर चलाते थे , पर आए दिन उनके हाथ तंग ही रहते थे।
आज भी लीना घर के बढ़ते खर्चे से परेशान होकर बड़बड़ा रही थी।
और... अमित को सुना सुनाकर कह रही थी।
"मुझे शादी करके कौन सा सुख मिला? बस कुछ दिन तक खुशियाँ थीं, उसके बाद से तो पैसे का ही टंटा चलता रहता है। हुह...चार दिनों की चाँदनी, फिर अँधेरी रात!"
वह सोच रही थी।
कभी अमित को भला बुरा कहती तो कभी अपने भाग्य को कोसती। कई बार उसके आँसू उसके गालों तक आकर सूख गए थे। हवा के झोंके ने जब उसके बालों के साथ छेड़खानी करनी शुरु कर दी तब उसे एहसास हुआ कि वह काफी देर से बालकनी में खड़ी है और उसकी चाय तो कब की ठंडी हो चुकी।
...
बाहर ठंडी हवा चल रही थी पर बारिश थम चुकी थी। उसके अंदर का तूफान भी अब थमने थमने पर था। जब बारिश रुकी और हलकी सी हवा उसके गालों को छूकर गुजर गई तब उसे एहसास हुआ कि अब बारिश थम गई और अब उसका मन भी शांत हो चला था।
यह लीना थी.... जो इन दिनों बढ़ते खर्चे और अपने पति अमित की वज़ह से परेशान थी। यह तीसरा दिन था जब दोनों पति-पत्नी में बातचीत बंद थी। इन दिनों हमेशा ऐसा ही होता था। जब से अमित की नौकरी चली गई थी, वह लीना से बहुत कम बोलता था।
और दिन भर नौकरी की तलाश करता और रात में आकर थक कर सो जाता था। शुरु शुरु में तो लीना ने उसका साहस बढ़ाया पर जब दो महीने बाद भी अमित को कहीं नौकरी नहीं मिली तो लीना के तेवर भी बदलने लगे थे।
परसों शाम को भी अमित जब थक हार कर घर आया तब लीना ने थोड़ी देर तक उसे नजर अंदाज किया। जब अमित ने उससे चाय मांगा तब जाकर वह बेमन से चाय बना कर लाई और कहने लगी,
" कुछ दिन तक तो चाय भी चलेगी उसके बाद मैं नहीं जानती कि घर का खर्चा कैसे चलेगा? "
.फिर लीना ने एक ऐसा तंज कसा कि अमित तिलमिलाकर रह गया। कदाचित उसने अपनी पत्नी से यह उम्मीद नहीं की थी कि तंगी ए दौर में वह उसकी मदद करने के बजाए उसकी कमियाँ गिनाने लगेगी। इधर अमित का हृदय छलनी हुआ जा रहा था उधर लीना का बोलना लगातार जारी था। आज वह जैसे अपने मन का सारा ज़हर उगल देना चाहती थी।
"अगर मुझे पहले पता होता कि मेरे पापा एक ऐसे लड़के से मेरा विवाह कर देंगे जो जिसके पास कोई टेक्निकल डिग्री नहीं है। जो मात्र ग्रेजुएट है। तब मैं इस शादी के लिए कभी हाँ नहीं करती!" अब अमित से नहीं रहा गया तो वह भी तल्ख़ होकर बोल पड़ा,
"यह सब तुम मुझे अब क्यों सुना रही हो? तुम्हें तो पता है कि मुझे नौकरी मेरे अनुभव के आधार पर मिली थी। मुझे मोटर पार्ट्स के बारे में बहुत ही गहरी जानकारी है। क्योंकि स्कूल के बाद और कॉलेज के बाद भी मैं मोटर पार्ट्स की दुकान में पार्ट टाइम नौकरी करता था और उसी से अपनी आगे की पढ़ाई भी करता था। और कुछ पैसे में घर के खर्चे में भी देता था। तभी हमारे घर की स्थिति इतनी अच्छी हुई, जिसे घर को देखकर तुम्हारे पिता तुम्हारा रिश्ता लेकर आए थे।
.... आज बस थोड़ी मेरी आर्थिक स्थिति डांवाडोल हुई है। मैं बहुत दुखी हूं कि कोरोना काल में मेरी नौकरी चली गई है। बस थोड़ा धैर्य रखो। जल्दी ही मुझे नौकरी मिल जाएगी। उसके बाद सब ठीक हो जाएगा!"
"दो महीने से यही कहते आ रहे हो। पता नहीं तुम्हें नौकरी कब मिलेगी?" कह कर चाय का कप पटक कर लीना अंदर की कमरे में चली गई। और अमित खड़ा होकर सोचने लगा कि...
इस वक्त जब उसे जीवन साथी के सपोर्ट की सबसे ज्यादा जरूरत है। तभी लीना उससे ऐसा व्यवहार कर रही है। इसका मतलब लीना उससे प्रेम नहीं करती। क्योंकि जो प्यार करते हैं वह हमें मुसीबत के समय अकेला नहीं छोड़ते और ना ही अपमान करते हैं। इन दिनों लीना जिस तरह से बात बात पर उसका अपमान कर रही थी, इससे अमित समझ तो रहा था लेकिन आज उसकी आंखें खुल गई थी कि रीना ने सिर्फ अपने सुख के लिए उससे शादी किया था। और शायद उसे अमित की नौकरी और सुन्दर व्यक्तित्व से यह गलतफहमी हो गई थी कि अमित के पास बहुत सारी डिग्रियां हैं जबकि अमित अपनी मेहनत और लगन के बल पर आगे बढ़ा था और ज़ब कंपनी कॉस्ट कटिंग की वजह से स्टाफ की छंटनी कर रही थी तो अमित के पास सिर्फ अनुभव था डिग्री नहीं। सो मज़बूरन उसे नौकरी से हाथ धोना पड़ा था।
पर... यह सब बातें लीना समझती तब ना...?
जीवनसाथी और विवाह का मतलब तो उसे पता ही नहीं है। जब दो लोग विवाह करते हैं सहचर बनते हैं तो हमेशा एक दूसरे का साथ देना पड़ता है। लेकिन यह सब बातें अमित लीना को कैसे समझा सकता है।
लीना तो उसे गलत मानती है और उसका अपमान करने से नहीं चूकती थी। जबकि शादी के समय अमित ने और उसके परिवार वालों ने कोई बात नहीं छुपाई थी। सारी स्थिति लीना के पिता के सामने स्पष्ट थी। उनकी पारखी नजर ने मेहनती और होनहार अमित की प्रतिभा पहचान कर उसके उज़्ज़वल भविष्य को देखते हुए ही अपनी लाडली नकचढ़ी बेटी का हाथ अमित के हाथ में दिया था। और अमित...?
उसने तो बड़े ही प्यार से लीना को अपनाया था। उसके घरवाले भी सरल हृदय के थे। सो लीना को भरपूर स्नेह व सम्मान मिला था। बहरहाल... पति पत्नी का अबोला कुछ दिन चला फिर दोनों में हलकी फुल्की बातचीत शुरू हो गई। पर दोनों का व्यवहार कुछ असहज़ सा था।
जबसे लीना ने अमित का अपमान किया था, वह उससे और भी कटा कटा रहने लगा था। दोनों में बड़े ही संक्षिप्त संवाद हुआ करते थे। इधर लीना अपनी ही दुनियाँ में खोई रहती।
पर.....अमित का कम बोलना उसे अब अखरने लगा था. धीरे धीरे उसे अपनी गलती का एहसास होने लगा था। क्योंकि गुस्से में या लड़ाई में कभी भी अमित उसका या उसके परिवार वालों का अपमान नहीं करता था।
वह पूरी कोशिश करता कि ऐसा कुछ ना बोले।
जिससे लीना को कोई दुख पहुंचे। लीना एक दिन अपनी सहेली सुभद्रा से मिली तो उसने उसे समझाया कि,
"अगर अमित इन दिनों आर्थिक तंगी से गुज़र रहा है तो तू कोई नौकरी कर ले। इससे तू अपनी शिक्षा का सदुपयोग भी कर पायेगी और घर के खर्चे में तेरा भी कुछ योगदान हो जायेगा!"
सुभद्रा की बात लीना को जँच गई।
उसे सिलाई का भी शौक था और तरह तरह के फैशन का आईडिया भी। कुछ गुण तो इंसान में जन्मजात होते हैं बस उन्हें थोड़ा पॉलिश की ज़रूरत पड़ती है।
सुभद्रा ने लीना की रुचि देखकर अपनी एक जान पहचान वाली महिला के बुटीक में काम दिलवा दिया। लीना सुबह अमित के ऑफिस जाने के बाद बुटीक को निकल जाती और शाम तक वापिस आ जाती।
उसे काम करते हुए तीन महीने हो गए तब उसने इससे संबंधित छः महीने का कोर्स करके अच्छी नौकरी की तलाश में लग गई। वह एक ही बार अमित को सरप्राइज देना चाहती थी। अब दोनों व्यस्त थे तो उनमें झगड़े भी ना के बराबर ही होते थे। अब लीना अमित का अपमान नहीं करती थी...!
अमित के लिए यही काफ़ी था। इससे घर की शांति बरकारार थी। इधर लीना अपने काम में व्यस्त थी तो उधर कुछ महीनों के सतत प्रयास के बाद अमित को एक बहुत बड़ी मोटर कंपनी में नौकरी मिल गई। अब वह नौकरी के साथ शाम का कुछ वक्त अपनी डिग्री बढ़ाने में भी लगाने लगा और टेक्निकल डिग्री और प्राइवेट एमबीए की डिग्री के लिए भी कोशिश करने लगा।
अब अमित जब देर से आता तब लीना अक्सर पूछती कि उसे इतनी देर कहाँ हो जाती है तो वह ओवर टाइम का बहाना करता। क्योंकि एक बार उसकी नौकरी जा चुकी थी इसलिए लीना भी कुछ नहीं कहती थी क्योंकि अमित नौकरी के प्रति और भी सावधान हो गया था और इसके अलावा अब लीना को वह घर खर्च के आलावा भी एक्स्ट्रा पैसे देने लगा था। सो अब लीना ख़ुश रहने लगी थी।
अमित की मेहनत धीरे धीरे रंग ला रही थी। लगभग दो साल के बाद अमित ने एक बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी के लिए अप्लाई किया और उसे वहां नौकरी मिल गई।
उस दिन जब वह खुशी-खुशी घर आ रहा था तो उसके मन में एक ही सवाल था कि ....
आज लीना कितनी खुश होगी। वह लीना को आज बहुत खुश देखना चाहता था। वह जब घर पहुंचा तो लीना ने घर को बहुत अच्छे से सजाया हुआ था। वह खुद भी सजी संवरी बहुत अच्छे कपड़े में उसका स्वागत कर रही थी। अमित को एक पल के लिए लगा कि शायद लीना को पता है कि उसे आज बहुत अच्छी नौकरी मिली है। उसने लीना से पूछा, "क्या बात है ? आज तुम बहुत बहुत खुश होकर मेरा स्वागत कर रही हो?" लीना ने कहा, "एक खुशखबरी है , मुझे एक अच्छी नौकरी मिल गई है!
" अमित ने जब अपनी नौकरी की बात सुनाई तो दोनों की आँखों में खुशी के आंसू थे। और काफी देर तक दोनों एक दूसरे से लिपटे रहे और जीवन साथी के साथ को सहचर के प्रेम को महसूस करते रहे। दोनों ने पिछले डेढ़ साल के अपने अपने संघर्ष की बात एक दूसरे को बताई और देर तक एक दूसरे का हाथ थामकर अपने रिश्ते की गहराई और प्यार को महसूस करते रहे। उस रात खाना खाने के बाद देर तक दोनों आंगन में चाँद की चांदनी में बैठे रहे और आपस में बतियाते रहे। अमित ने कहा ,
"कभी भी किसी रिश्ते में किसी दिन अगर पति पत्नी में किसी एक के साथ मुश्किल आए तब उसे छोड़कर नहीं जाना चाहिए और ना ही उसका अपमान करना चाहिए। बल्कि इंतजार करना चाहिए। क्योंकी जब अच्छे दिन आते हैं और ज़ब दो इंसान मेहनत करके एक दूसरे को दिल से अपनाकर आगे बढ़ते हैँ तो ऐसे जीवनसाथी एक दूसरे के पूरक बन जाते हैं!" लीना ने कहा ,
"एकदम सही कह रहे हो तुम। शुरू में मैं ने तुम्हारा अपमान कर दिया था। फिर जब मैं नौकरी के लिए दर-दर भटकने लगी और मुझे बहुत मुश्किल से नौकरी मिली तब मैं तुम्हारा दर्द समझ पाई। हो सके तो मुझे माफ कर देना !" इस तरह दोनों पति पत्नी ने एक दूसरे से माफी मांगी। वक्त के साथ एक दूसरे का साथ देते रहे और एक दूसरे के मन में जगह बनाते गए। अब उनका प्यार पहले से भी ज्यादा मजबूत हो गया था।
प्रिय पाठकों ,
नमस्कार।
जीवनसाथी के साथ ऐसा ही होता है। कभी जीवन में ऊंच-नीच हो सकता है लेकिन कभी भी अपने साथी का अपमान नहीं करना चाहिए। क्योंकि एक इंसान सिर्फ प्यार से और प्रोत्साहन से आगे बढ़ सकता है अपमान से अगर आगे बढ़ेगा तो मन में नकारात्मक भाव रहेंगे। और जो इंसान अपमान करता है उसके प्रति हमेशा एक गलत भावना रहेगी इसलिए प्यार से अपनाएं और एक दूसरे की कमज़ोरी नहीं बल्कि एक दूसरे की ताकत बनो तभी सही मायने में जीवनसाथी का साथ निभा पाओगे।
जब शादी किया है तो इस रिश्ते को बहुत जिम्मेदारी के साथ निभाएं तभी रिश्ता फल फूल सकता है।
(समाप्त)
