STORYMIRROR

kamni gupta

Abstract Romance

3  

kamni gupta

Abstract Romance

अश्क..

अश्क..

1 min
201

अश्क बेवजह न तुम ये गंवाया करो,

राज़ गहरे न यूँ सबको बताया करो । 


मौन रहकर क्यों देते हो हवा ज़ख्मों को,

मुस्कुरा कर बातें दिल की सुनाया करो। 


अश्क बहते रहे तो क्या होगा हासिल,

आंखों को न ऐसे बोझिल बनाया करो । 


चेहरे पे आपके हसीन लगती हैं शोखियां,

उलझी लटों को न खुद से सुलझाया करो । 


खुशी में शामिल करो सभी को चाहे फिर ,

ग़म हों अगर पास तो हमें ही बुलाया करो । 



Rate this content
Log in

More hindi poem from kamni gupta

Similar hindi poem from Abstract