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सुरशक्ति गुप्ता

Inspirational

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सुरशक्ति गुप्ता

Inspirational

अन्तर्मन

अन्तर्मन

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फूटे कुम्भ के अवशेष यहां

दुर्दिन दिन के भावावेश कहां

ठहर गई अनुभूति सुषुप्त हवा में

हरण करती हुई चीख जहां......


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