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J P Raghuwanshi

Inspirational

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J P Raghuwanshi

Inspirational

"अनंत सम्भावनायें"

"अनंत सम्भावनायें"

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तुम्हें क्या हुआ,

सहमें बैठे हो।

क्या नहीं है, तुम्हारे पास,

अनंत सम्भावनायें समेटे हो।


बूंद-बूंद से, घड़ा भरता है,

पेड़ भी कहां एक दम फलता है।

समझ नहीं आता,

अपनों से क्यों ऐंठे हो।

जब कि तुम,

अनंत सम्भावनायें समेटे हो।


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