अनकही फरियाद
अनकही फरियाद
खामोशी में जो दबी है, वो बात कर दे,
दिल की तन्हाई छुपा, एक रात कर दे।
आँखों के आँसुओं से कहे हालात मेरे,
ये तन्हाई मेरी, अब कायनात कर दे।
लबों तक आई न जो सदियों से कभी,
वे अनकही फरियाद सौगात कर दे।
छीन ली दुनिया ने जो मासूम सी हंसी,
फिर से बहारों को कोई जज्बात कर दे।
दिल के जख्मों को मरहम मिल जाए,
किसी की दुआ, मेरे लिए आस कर दे।
बस तू सुन ले, ऐ खुदा, ये चुप्पी मेरी,
जो दर्द छिपा है, उसे करामात कर दे।
हर ख्वाब जो टूटे , उसको तू मोड़ दे,
मेरे बिखरे वजूद को पूरी रात कर दे।
