STORYMIRROR

Dr. Vijay Laxmi"अनाम अपराजिता "

Abstract

4  

Dr. Vijay Laxmi"अनाम अपराजिता "

Abstract

अनकही फरियाद

अनकही फरियाद

1 min
9

खामोशी में जो दबी है, वो बात कर दे,

दिल की तन्हाई छुपा, एक रात कर दे।

आँखों के आँसुओं से कहे हालात मेरे,

ये तन्हाई मेरी, अब कायनात कर दे।

लबों तक आई न जो सदियों से कभी,

वे अनकही फरियाद सौगात कर दे।

छीन ली दुनिया ने जो मासूम सी हंसी,

फिर से बहारों को कोई जज्बात कर दे।

दिल के जख्मों को मरहम मिल जाए,

किसी की दुआ, मेरे लिए आस कर दे।

बस तू सुन ले, ऐ खुदा, ये चुप्पी मेरी,

जो दर्द छिपा है, उसे करामात कर दे।

हर ख्वाब जो टूटे , उसको तू मोड़ दे,

मेरे बिखरे वजूद को पूरी रात कर दे।

                 



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract