*अनायास*
*अनायास*
*अनहोनी*
कभी कभी दुःख से कैसा साक्षात्कार हो जाता है,
जो जीवन की सारी खुशियों को चौपट कर जाता है।
इस जीवन में अनायास कितनी अनहोनी झेली हैं,
सिर की तीन हड्डियाँ टूटीं, वो भी हँसकर झेली हैं।
दामाद का असमय निधन हुआ, तब बिल्कुल टूट चुके थे हम,
दो वर्षों तक गमगीन रहे, ग़म से नहीं उबर सके थे हम।
फिर यही सोचकर सब्र किया, होनी तो होकर रहती है,
जब घड़ी मौत की आ जाए, रोके से नहीं रुक सकती है।
मुश्किल से आँसू सूखे थे कि फिर से अनहोनी हो गई।
अनायास विधवा बेटी का जीवन ,अंधेरा ही कर गई।
उसकी एक आँख की रोशनी,लगभग खत्म हो चुकी है।
मेरी बेटी की और हमारी, खुशियाँ भस्म हो चुकी हैं।
यदि यह भी होनी होती तो, शायद मन को समझा लेते।
कोई निदान मिल जाये कहीं से, तो इसको सुलझा लेते।
ईश्वर किसी- किसी की बहुत परीक्षा लेता है।
जो बुरा किसी का नहीं सोचते,
उन्हें ज्यादा परखता है।
मगर हम भी हिम्मत नहीं हारेंगे,
जानते हैं कि विधि का विधान है....
सुख भी सदा नहीं रहता, दिन बुरे बीत ही जायेंगे।
घिर आए जो दुःख के बादल,
धीरे- धीरे छँट जायेंगे।
दिया कष्ट गर प्रभु ने मुझको, दूर भी वही भगायेंगे।
बेटी की हिम्मत बनना है, मन को रख कर शांत।
ग़म की रात भी गुजर जायेगी, मन मत हो तू क्लान्त।
इतने मानसिक कष्ट के बाद भी, साँसें मेरी चल रही हैं,
यानी अभी भी और बर्दाश्त कर सकती हूँ ...
ऊपर वाला आजमाने में नहीं हारता,
हम उसे हराने की कोशिश में क्यों हारें?
जब तक साँसे चल रही हैं,
तब तक संताप के लिए समय नहीं है।
"ये जीवन.... धीरज,और साधना का नाम है।
अनायास आ जाते इसमें...
खुशियों और ग़म के मुकाम हैं।
हर ग़म को छोटा समझो, और आशा बहुत बड़ी है।
भले ही कदम- कदम पर लाखों दुश्वारियाँ खड़ी हैं।
जिन्दगी तू इम्तिहान लेती रह,
हम भी हार मानने वाले नहीं हैं।
अब संघर्षों का सामना करने की आदत हो गई है।
तू हमें हराने की कोशिश कर
और हम तुझे हराने के लिए संघर्ष करते रहेंगे
और मुझे पूरा विश्वास है कि हम एक नया इतिहास रच कर
दुनिया में अपनी मिसाल कायम करेंगे।
