STORYMIRROR

Dr Hoshiar Singh Yadav Writer

Abstract

4  

Dr Hoshiar Singh Yadav Writer

Abstract

अलविदा

अलविदा

1 min
259


11 माह से इंतजार था, फिर दिसंबर आया,

सोचते थे सर्दी अच्छी, जिसका फल पाया।

आ गया मेहमान बन, अब कर ले ते तैयारी,

खुशी खुशी अलविदा,विनति बस है हमारी।।


बहुत सताया तूने है,कितने गये स्वर्ग सिधार,

छीन लिये कितने अपने,जिनसे था हमें प्यार।

चले जाओ अच्छा हो, नव वर्ष अब आएगा,

जनवरी माह आ गया तो, ढूंढा भी न पाएगा।


आता है वह जाता भी है, कहते आये लोग,

ज्यादा दिन डटा रहने का, बुरा बहुत है रोग।

पर कद्र खो देता वो, एक जगह रुक जाएगा,

चंद दिन रुककर जाये, नाम जगत में पाएगा।


ऊब गये हैं दिसंबर से, जनवरी हो जन जान,

देख बीत गया साल 23,निज को पुराना मान।

वर्ष 2024 आ रहा, कितनी ही लेके पहचान,

चला जा उठा सामान,दो दिनों का है महमान।


चले गये कितने यहां, कोई नहीं करता याद,

जैसे फांसी चढ़ा जाए, चला जाएगा जल्लाद।

तेरे को भी देकर फांसी, बुला रहे नया साल,

आराम कर ले अब तू,बन जाएगा भूतकाल।।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract