Aradhana Mishra
Classics
अक्सर,
अकेली होती हूँ मैं।
अपने ख़्याल,
अपने जज़्बातों की,
एक पक्की सहेली होती हूँ मैं।
कोई सुलझा ही नहीं पाता,
ज्यादातर एक उलझी हुई,
पहेली होती हूँ मैं।
काश
घर सूना हो गय...
अक्सर
हो जाने दो
चिड़िया (लड़क...
मन की पतंग
हर तन के पिंजर में धड़कन बन बहती रहे देर तलक। हर तन के पिंजर में धड़कन बन बहती रहे देर तलक।
तुम्हारा जीवंत प्रेम रेल की पटरियों से दौड़ता हुआ बादलों के गुच्छों से लिपट जाता है तुम्हारा जीवंत प्रेम रेल की पटरियों से दौड़ता हुआ बादलों के गुच्छों से ...
मगर मन में हैं कुछ सवाल जो तुमसे पूछ नही पाता हूँ मगर मन में हैं कुछ सवाल जो तुमसे पूछ नही पाता हूँ
सुनो... ए निद्रासन में आसीन यशोधरा। सुनो... ए निद्रासन में आसीन यशोधरा।
हठ मेरा वो सही गलत क्या इसका मुझको ज्ञान नहीं। हठ मेरा वो सही गलत क्या इसका मुझको ज्ञान नहीं।
गोपियों का प्रिय लिखूं या राधा का प्रियतम लिखूं। गोपियों का प्रिय लिखूं या राधा का प्रियतम लिखूं।
वाल्मीकि संग सिया पुनः , राम समक्ष आ खड़ी हुई। वाल्मीकि संग सिया पुनः , राम समक्ष आ खड़ी हुई।
दशरथ नंदन रघुपति का युग , रामराज्य कहलाया। दशरथ नंदन रघुपति का युग , रामराज्य कहलाया।
ठहर पाई नहीं कश्ती उस कयामत के सैलाब में थी दोनों की साँसे उफान पर और आँखें बंद हो गई नाग और चन्... ठहर पाई नहीं कश्ती उस कयामत के सैलाब में थी दोनों की साँसे उफान पर और आँखें बं...
तीव्र वेग से वह्नि आती क्या तुम तनकर रहते हो? तो भूतेश से अश्वत्थामा क्यों ठनकर यूँ तीव्र वेग से वह्नि आती क्या तुम तनकर रहते हो? तो भूतेश से अश्वत्थामा क्यों ठ...
पर कभी तो एसा होगा एक दिन मैं नहीं लौटूंगा। पर कभी तो एसा होगा एक दिन मैं नहीं लौटूंगा।
द्रोणपुत्र के पुरुषार्थ से हुआ तिरोहित खौफ निराशा। द्रोणपुत्र के पुरुषार्थ से हुआ तिरोहित खौफ निराशा।
तुम्हे राम छुड़ाने आयेगें। सीते तुम विश्र्वास रखो ... तुम्हे राम छुड़ाने आयेगें। सीते तुम विश्र्वास रखो ...
चलो आज आपको एक पौराणिक कथा सुनाते हैं, विष्णु और लक्ष्मी जी के विवाह पर लेकर जाते हैं। चलो आज आपको एक पौराणिक कथा सुनाते हैं, विष्णु और लक्ष्मी जी के विवाह पर लेकर...
युद्ध भयंकर हो रहा देखो,चल रहे तीरन पर खूब तीर। युद्ध भयंकर हो रहा देखो,चल रहे तीरन पर खूब तीर।
तुमसे मिलने को शायद मैं बेमतलब ही लालायित थी। तुमसे मिलने को शायद मैं बेमतलब ही लालायित थी।
जब तक यह नज़्म उस याद का वो पुल पार न कर दे। एक ट्रेन है नज़्म, नज़्म एक ट्रेन है। जब तक यह नज़्म उस याद का वो पुल पार न कर दे। एक ट्रेन है नज़्म, नज़्म ए...
बोले श्री हरी की है नारद वो है माँ की ममता, जिसे पाने मैं लेता हूँ जन्म बार बार। बोले श्री हरी की है नारद वो है माँ की ममता, जिसे पाने मैं लेता हूँ जन्म बार बा...
कृपाचार्य कृतवर्मा सहचर मुझको फिर क्या होता भय। कृपाचार्य कृतवर्मा सहचर मुझको फिर क्या होता भय।
ग्वालवालों और कृष्ण ने जब देखा कोई पता ठिकाना ना पशुओं का। ग्वालवालों और कृष्ण ने जब देखा कोई पता ठिकाना ना पशुओं का।