अजनबी
अजनबी
अजनबी तेरे नाम से ,आज भी धड़कता ये दिल ,
तन्हाई में कभी तो तू ,एक बार मुझसे से आके मिल।
वो मोहब्बत की सारी बातें निराली ,मासूम थीं मगर थीं प्यारी ,
उन बातों में खोकर ही दिल ने ये जाना ,बड़ा दर्द देता अजनबी से दिल लगाना।
तेरी हर बात पर करके भरोसा ,हमने खुद को तेरे आगे परोसा ,
तूने खाया आधा या पूरा दीवाने ,तेरी मस्ती में खोकर ये दिल कुछ ना जाने।
ओ अजनबी तेरी बातों की गर्मी ,करनी पड़ी हमको भी बेशर्मी ,
सारी सारी रात तेरे संग हम जागे ,हजारों किये थे तब झूठे वादे।
अजनबी के संग ये दिल लगाना ,होता बड़ा सच में महंगा फसाना ,
इसलिये जब भी कोई अजनबी मुस्कुराये ,समझ लेना तुमको भी ना अब नींद आये।|

