अजनबी तेरे नाम से ,
आज भी धड़कता ये दिल ,
तन्हाई में कभी तो तू ,
एक बार मुझसे से आके मिल |
वो मोहब्बत की सारी बातें निराली ,
मासूम थीं मगर थीं प्यारी ,
उन बातों में खोकर ही दिल ने ये जाना ,
बड़ा दर्द देता अजनबी से दिल लगाना |
तेरी हर बात पर करके भरोसा ,
हमने खुद को तेरे आगे परोसा ,
तूने खाया आधा या पूरा दीवाने ,
तेरी मस्ती में खोकर ये
दिल कुछ ना जाने |
ओ अजनबी तेरी बातों की गर्मी ,
करनी पड़ी हमको भी बेशर्मी ,
सारी सारी रात तेरे संग हम जागे ,
हजारों किये थे तब झूठे वादे |
अजनबी के संग ये दिल लगाना ,
होता बड़ा सच में महंगा फसाना ,
इसलिये जब भी कोई अजनबी मुस्कुराये ,
समझ लेना तुमको भी ना अब नींद आये ||