STORYMIRROR

Ramesh Kumar Yogi

Abstract

4  

Ramesh Kumar Yogi

Abstract

ऐसा रंग लगाना

ऐसा रंग लगाना

1 min
352

तन मन जीवन को महका दे ऐसा रंग लगाना

मत नियत तन को छुने की रखकर रंग लगाना


शिष्टाचार निभाओ हरपल बुरी वासना भूल

खिला रहे रिश्तों का उपवन ऐसा रंग लगाना।।


पावन प्रीत के पावन पर्व पे सबको गले लगाना

मन के सारे रंज द्वेष को मन से आज मिटाना


लेकर अबीर गुलाल क्रोध को दूर भगाओ

होली है प्रीत का पर्व प्रीत का सबको रंग लगाना।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract