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Ramesh Kumar Yogi

Inspirational

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Ramesh Kumar Yogi

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जय महाकाल

जय महाकाल

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जो काल के भी काल है, जो भक्त प्रतिपाल है

बड़े दयालु शिव प्रभु, पल में करे निहाल है।।


धरा रची गगन रचा, वो शक्ति का प्रवाह है

वो सौम्य है सरल भी है, वो रुद्र है विकराल है।।


समस्त देवता भी मिल, करे है जिनकी वंदना

वो आशुतोष नीलकंठ, गले भुजंग माल है।।


वो सूक्ष्म रूप धर, धरा पर पूर्ण विद्यमान है

वो है सृजन की मूर्ति, वो काल का भी गाल है।।


वो योगियों के योगी है, सबके बने सहयोगी है

जटा विराजे गंग जिनके, त्रिनेत्र सोहे भाल है।।


अजन्मे है जगत में जो, विकार जिनसे दूर है

विजय किया काम पर, वो शंभु महाकाल है।।


शिवा शिवा भजो सदा, मिटेगी मन की आपदा

न इस जगत में दूसरा, शिवा समान ज्वाल है।।


अनन्त दिग दिगंत में, आदि और अंत में

भूपति और रंक में ममता के शीतल अंक में।।


सृजन का तू आधार है, तू गौण है साकार है

सामर्थ्य का तू आगार है, तू निम्न है विस्तार है।।


असहाय का सहाय तू, सकल जगत पिताय तू

त्रिलोकी नाथ हे शिवा, सर्व शक्ति का प्रदाय तू।।



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