अहिंसा परमो धर्म:
अहिंसा परमो धर्म:
शहीद दिवस (३० जनवरी) पर विशेष अहिंसा परमो धर्म *********** राष्ट्र पिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर आज देश शहीद दिवस मना रहा है, शहीदों को याद कर नमन कर रहा है, सच मानिए! सिर्फ औपचारिकता निभा रहा है। विचार कीजिए! कि जिस बापू की पुण्यतिथि पर देश आज शहीद दिवस मना रहा है, उस बापू के सर्व-धर्म समभाव और सत्य-अहिंसा के संदेश का भला कितना अनुसरण कर रहा है? अहिंसा परमो धर्म: की राह पर चल रहा है? अन्याय का कितना नैतिक प्रतिकार कर रहा है? स्वच्छता, नैतिकता, सादगी, स्वालंबन का कितना अनुसरण कर रहा है? दीन-दुखियों की सेवा को कितना मानव धर्म समझ रहा है? श्रम को पूजा मान कितना परिश्रम कर रहा है? निज राष्ट्र को जाति-धर्म, भाषा-क्षेत्र, ऊँच- नीच, भेदभाव से ऊपर कहां मान रहा है? गाँधी जी के आदर्शो पर भला कितने कदम चल रहा है? आजादी और शहीदों को सचमुच सम्मान दे रहा है? आज जनमानस के लिए प्रश्न बड़ा गंभीर है, जिसका उत्तर हम सबको तलाशने की जरूरत है, मगर उससे पहले खुद में झाँकने की जरूरत है। अपवादों का उदाहरण देकर पीठ मत थपथपाइए, भ्रष्टाचार, अत्याचार, विविध संघर्ष राजनीति विद्वेष, निजी स्वार्थ और नैतिक मूल्यों के अवमूल्यन पर भी जरा नजर दौड़ाइए। शहीद दिवस की आड़ में बापू की गरिमा को अब और नीचे तो न गिराइए, शहीदों की आत्माओं को तो न रुलाइए, यही समय है, सही समय है, अब तो संभल जाइए दिखावे की परिपाटी पर विराम लगाइए, राष्ट्र पिता और शहीदों को भले ही भूल जाइए राष्ट्र भक्त बनिए न बनिए कम से कम आज शहीद दिवस पर राष्ट्र भक्त इंसान बनकर तो दिखाइए तब जाकर शहीदों को श्रद्धा से शीश झुकाइए बापू की आत्मा को भी गर्व का अहसास कराइए। वंदेमातरम् और रामधुन साथ -साथ गाइए, और तब ही आप शहीद दिवस पर मनाइए, औपचारिकता निभाने से अब बाज आ जाइए अहिंसा परमो धर्म: का संदेश फैलाइए। सुधीर श्रीवास्तव
