अगर दोस्त न होते .....
अगर दोस्त न होते .....
इस धरती पर अगर दोस्त न होते तो क्या होता?
रामायण में फिर राम को सुग्रीव न मिलते ,
और हनुमान दर दर दर भटकते रोते,
न तो रावण का होता संहार,
न सीता कर पाती लंका पार !
उफ़ ये दोस्त न होते तो ये मंज़र कैसा होता?
महाभारत की फिर कैसी होती कहानी?
आग का दरिया होती न होता वहां पानी ...
कृष्ण-अर्जुन में अगर सखा भाव न होता तो
महाभारत का युद्ध न हो पाता ...
भक्त अर्जुन कैसे परम ब्रहम कृष्ण को जान पाता?
न तो गीता का उपदेश होता, न महाभारत लिखी जाती !!
अगर दोस्ती न होती तो क्या होता सच पूछिए तो एक गम का दरिया होता !!
पर खुदा का लाख लाख शुक्रिया जो दोस्ती का रंग इस धरा को दिया !
जिसने हर मंज़र को खुशियों से भर दिया !!
इस दोस्ती ने ही राम को हनुमान और सुग्रीव से मिलाया !
इस दोस्ती की खातिर लक्ष्मण ऐशो आराम छोड़कर वन में राम के साथ आया !!
इस दोस्ती की वजह से विभीषण ने अपना शीश राम के आगे नवाया !!
और रावण का हुआ संहार, मिली सीता राम को और चले वे लंका पार !!
दोस्ती के कारण ही धरम की नहीं हुई हानि, यह बात अर्जुन ने कृष्ण से जानी !
दुनिया गीता के उपदेशों को मानी !!
अतः दोस्तों तुम भी अपनी दोस्ती को निभाना !!
कलयुग के इस दौर में मित्र के कर्तव्यों को न भूल जाना.....।
