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Dhinal Ganvit

Abstract

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Dhinal Ganvit

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अधूरी दास्तान !

अधूरी दास्तान !

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दिल है... ये..!

थोड़ा समझता नहीं..!

कहता है...

मेरे प्यार की..

कहानी बताकर ही !


दम लेगा..!

उस दिल को कैसे समझाए ?

उसका प्यार एक तरफा !

ओर खाली खाली सा है।


जैसे मानो अधूरे सपने !

जैसे मानो अधूरी रात !

जैसे मानो अधूरी दास्ताने !


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