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Sunita Singh

Abstract

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Sunita Singh

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अधिकार

अधिकार

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वे मुस्काते फूल नहीं जिनको आता है मुरझाना

नीलम के मेघ नहीं जिनको है घुल जाने की चाह

हो तारों के दीप नहीं जिनको है बुझाने की राह

यही है मेरा अधिकार।


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